राजकुमार सिंह उम्र – 42 वर्ष

राजकुमार सिंह उम्र – 42 वर्ष

जब मेरा बेटा विष्णु दो साल का था, तब अचानक एक दिन उसको तेज बुखार और पेट दर्द हुआ। मैं उसको डॉक्टर के यहां लेकर गया। दवाई ली, लेकिन थोड़ा सा ही आराम मिला| इसके बाद तीन साल तक मैंने उसको जयपुर के अच्छे-से अच्छे डॉक्टर्स को दिखाया| लेकिन उसको कोई फायदा नहीं हो रहा था, वह बिल्कुल कमजोर होता जा रहा था, पेट फूल गया था, शरीर की नसे दिखाई देने लगी थी, उल्टी दस्त चालू हो गए। जांच कराने को पता लगा कि विष्णु को गेहूँं से एलर्जी है और इसका कोई इलाज नहीं है। फिर एक दिन जयपुर में होम्योपैथिक डॉक्टर, डॉ डी. एल. गंगवाल से मुलाकात की , विष्णु को दिखाया डाँक्टर साहब ने दवा स्टार्ट की | ढ़ाई साल तक इलाज चलाया| उसके बाद मेरा बेटा बिल्कुल ठीक हो गया । आज दवा बंद किए हुए एक साल से भी ज्यादा हो गया है, वह सब कुछ खा रहा है, बिल्कुल ठीक और एक्टिव है ।
मै डॉक्टर साहब का बहुत-बहुत आभारी हूँ।

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अशोक कुमार यादव – उम्र 37 वर्ष

मेरा नाम अशोक कुमार यादव है । मैं हरियाणा का रहने वाला हूँ । मेरे बेटे को अगस्त 2012 से गेहूँं की एलर्जी थी । मैंने जे के लोन और कई हॉस्पिटल में इलाज कराया परंतु कहीं से कुछ आराम नहीं मिल रहा था फिर मुझे डॉक्टर गंगवाल जी का पता चला मैंने इनसे इलाज कराया। दो महीने बाद से लक्ष्य गेहूँं खाने लग गए अब वह बिल्कुल ठीक है मैं डॉक्टर साहब के ईलाज से बहुत खुश हूँ ।
धन्यवाद

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नौशाद अली – उम्र 35 वर्ष

रेहान को दो वर्ष की आयु से ही गेहूँं से एलर्जी थी।हमने सब जगह दिखाया फिर भी कोई फर्क नहीं पड़ा, सभी डॉक्टर्स ने गेहूँं ना खिलाने की बात कही ।फिर हमारे एक रिश्तेदार ने हमें डॉक्टर गंगवाल से मिलाया । हमें डॉक्टर गंगवाल से पूर्ण संतुष्टि मिली।आज हमारा बच्चा डेढ़ साल से गेहूँं खा रहा है। हम डॉ गंगवाल जी के इलाज से पूर्ण रुप से संतुष्ट है ।

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अब्दुल खालिक – उम्र 35 वर्ष

मैं अब्दुल खालिक, मेरी बच्ची फैजमीन को 2 वर्ष की उम्र से ही गेहूँ से एलर्जी थी । जब मैंने उसे डॉक्टर को दिखाया तो डॉक्टर ने मुझे जिंदगी भर के लिए गेहूँं ना खिलाने की राय दी। मेरी एक रिश्तेदार जो कि पहले से ही अपनी बच्ची का डॉ गंगवाल के यहां पर इलाज करा रहे थे, के पास दिखाने को कहा । उनके बच्चे को देखकर जब मैं अपनी बच्ची फैजमीन को यहां पर दिखाया तो वास्तव मे आराम मिला ।आज फैजमीन पिछले 10 महीनें से गेहूँ की बनी हुई चीजें खा रही है, उसे कोई भी परेशानी नहीं है । मैं डॉक्टर साहब का बहुत-बहुत आभारी हूँ ।
धन्यवाद

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राधेश्याम सैनी – उम्र 35 वर्ष

पीयूष जैसे ही तीन साल का हुआ, उसे दस्त, पेट दर्द, पेट का फूलना, जुकाम -खांसी नियमित रूप से रहने लगी । हमेशा निढाल होकर पड़ा रहता था ।
वजन कम होने लगा । जानेमाने डॉक्टर्स को दिखाया, परंतु कोई फायदा नहीं हुआ। ढेरो जांचें करवाई, पर फिर भी कोई रास्ता नहीं निकला । फिर डॉक्टर ने ऐन्डोस्कोपी करवायी तब पता लगा कि छोटी आंत्र की विलाई नष्ट होने लगी है । डॉक्टर ने बताया कि इसे सीलिएक डिजीज है, यानी गेहूँं से एलर्जी की बीमारी । सभी डॉक्टर्स ने गेहूँ से एलर्जी को लाइलाज बीमारी बताया। फिर हमें डॉक्टर गंगवाल के बारे में पता लगा कि वह गेहूँ से एलर्जी का इलाज करते है, फिर हमने डॉक्टर साहब से इलाज लिया । इलाज के दौरान तीन महीने बाद डॉ गंगवाल ने पीयूष का गेहूँ खाना शुरू करवा दिया । अभी पीयूष 10/12/2012 से नियमित रूप से गेहूँ और गेहूँ से बनी हुई चीजें खा रहा है । TTG level भी सामान्य है।
मैं डॉक्टर साहब से पूर्ण रुप से संतुष्ट हूँ और उनका तहे दिल से शुक्रगुजार हूँ।
धन्यवाद

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सोनी सैनी उम्र – 50 वर्ष

मैं डॉक्टर साहब का बहुत-बहुत आभार व्यक्त करती हूँ | उनके मात्र डेढ़ साल के ट्रीटमेंट से मेरी थायराइड की बीमारी हमेशा हमेशा के लिए ठीक हो गई। मैं पिछले पांच वर्षो से रोजाना थायराइड की दवाई खाती थी। डॉ गंगवाल के इलाज के तुरंत बाद से मैंने थायराइड की दवा बंद कर दी। अभी मैं कोई सी भी दवाई नही खा रही हूँ और एक दम स्वस्थ हूँ।
धन्यवाद डॉक्टर साहब

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